ज़्यादा बुरा क्या है?

1. मुस्लिम वालिदैन जवान बच्चों को जल्दी शादी करने के लिए बढ़ावा दें – उनकी तरबियत कर के ज़हीन और संजीदा बनाएं ताकि वो शादी की ज़िम्मेदारियाँ उठा पाएं – लेकिन शुरू से ही उनसे ये तवक़्क़ो न करें कि वो पूरी तरह माली ऐतबार से ख़ुद-मुख़्तार हो जाएं, बल्कि ज़रूरत के लिहाज़ से उनकी मदद करते रहें। और इसी तरह तलाक़-शुदा लोगों से शादी करने में समाजी “बदमनी” थोड़ी कम हो – ताकि अगर किसी भी वजह से जवान जोड़ा ना जम पाये तो किसी भी फरीक़ को दुबारा शादी न हो पाने का डर न बना रहे।

या

2. आधे से ज़्यादा मुसलमान 22 की उम्र से पहले ज़िना का इर्तिक़ाब करें।

जहां तक ऑप्शन 1 की बात है तो – जाहिर है- इसमें पूरी क़ौम का बहुत ज़्यादा मजमुई ताव्वुन दरकार होगा और कुछ सोंचने के अंदाज़ में बुनियादी तदबिलियाँ भी। ऑप्शन 2 तो वैसे भी एक हक़ीक़त हो चुका है – या जल्द ही होने वाला है अगर मौजूदा सर्वे रिपोर्ट्स को सही माना जाए।

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Translated by: Md Adil Hussain

ज़्यादा बुरा क्या है?1. मुस्लिम वालिदैन जवान बच्चों को जल्दी शादी करने के लिए बढ़ावा दें – उनकी तरबियत कर के ज़हीन और…

Posted by Daniel Haqiqatjou – Hindi on Friday, January 5, 2018

Md Adil Hussain

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