सेक्युलरिज़्म इंसान को ज़िन्दगी के असल मक़सद और दूर-दराज़ नतीजों से गुमराह करके, सिर्फ मुख़्तसर मुद्दत के लिए बनाई जा रही तरकीबों में उलझाए रखने की शर्मनाक योजना का ख़ूबसूरत नाम है || ज़िन्दगी के संजीदा और तल्ख़ सवालों को ग़ैर-ज़रूरी समझकर किनारे लगा देना, सेक्युलरिज़्म की चाल ही नहीं बल्कि मजबूरी है, क्योंकि ये मौज़ू हक़ीक़त में सेक्युलरिज़्म के दायरे से बाहर हैं || ये मौज़ू धर्म के हल्क़े के अंदर बयान होते हैं !!

सेक्युलरिज़्म आपको किसी ‘काम’ की अहमियत तो बता देगा लेकिन उस काम के ‘आख़िरी नतीजों’ की सिर्फ एक धुंधली सी तस्वीर ही पेश कर सकेगा || ऐसा इसलिए, क्योंकि ‘आख़िरी नतीजे’ धर्म का मौज़ू हैं !!

सेक्युलरिज़्म आपको ‘वोट’ देने की तरग़ीब तो देगा, लेकिन कोई साफ़ और मुस्तहकम अख़लाक़ी नज़र नहीं देगा कि जिसकी बुनियाद पर ‘वोट’ दिया जाये।| ऐसा इसलिए, क्योंकि ‘साफ़ और मुस्तहकम अख़लाक़ी नज़र’ धर्म का मौज़ू है !!

सेक्युलरिज़्म आपको हर इंसान को बराबर से इज़्ज़त देने की नसीहत तो करेगा लेकिन ये नहीं बताएगा कि ‘इज़्ज़तदार’ होने के हक़ीक़ी मायने क्या हैं ? ऐसा इसलिए क्योंकि ‘इज़्ज़त’ और ‘इज़्ज़तदार’ की सही तशरीह धर्म का मौज़ू है ||

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ये सब पढ़कर आप सोच सकते हैं कि इंसान जैसे-जैसे, ज़्यादा सेक्युलर होता जाता है, यानी अख़लाक़ और किरदार से जुड़े किसी भी मुद्दे से बिलकुल बेपरवाह और हक़ीक़ी-अहमियत के मुद्दों से कोसों दूर तो वह ज़िन्दगी की पेचीदगियों से अलग होता जाता है ||

लेकिन आपका ये सोचना ग़लत होगा क्योंकि दिल कभी ख़ाली नहीं रह सकता || लिबरल-सेक्युलरवादी ख़ुश्की से पैदा हुआ ख़ालीपन, फ़ौरन, उन नीच सांस्कृतिक कलाकृतियों से भर जाता है, जिनको बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने बनाते हैं और जिन्हें माली-फायदे के वाहिद-मक़सद को लेकर चल रही मीडिया मशहूर करती है || वह मीडिया जो बेहयाई और बेशर्मी का फैलाव करके, इनको तहज़ीब का आम क़ानून बनाने के लिए हमेशा तैयार रहती है || और फिर ये बन जाता है अक्सरियत का धर्म – उनके औसाफ़ का असल माद्दा। || बस यही है वह नतीजा, वह मक़सद कि जिसको सेक्युलरिज़्म अपनी बुनियादी-साख़्त के बल-बूते पूरा कर के ही रहता है – यानी फरमांबरदार-दिमाग़ी-ग़ुलामों की पैदाइश ||

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“आमाल का दारोमदार नीयत पर है” – तोड़ है इस ज़हर का || हमेशा अपने आमाल और अपने वजूद को उनके हक़ीक़ी सर-चश्मे से जोड़े रखना, अपनी मंज़िल और अंजाम पर गहरी फ़िक्र और तदब्बुर – ये वह बातें हैं जो सिर्फ आपका ख़ालिक़ ही अता कर सकता है || तो, अपने दिल को तुच्छ-लिबरल-सेक्युलर तहज़ीब के फैलाव का ज़रिया बनने की बजाय पर उस बात से जुड़ने का आदी बनाइये जो हक़ीक़त में बहुत ज़रूरी है, जो सही मायनों में आपके काम आने वाली है !!

Translation of This post
Translated by: Faraz Bukhari

#सेक्युलरिज़्मसेक्युलरिज़्म इंसान को ज़िन्दगी के असल मक़सद और दूर-दराज़ नतीजों से गुमराह करके, सिर्फ मुख़्तसर मुद्दत के लिए…

Posted by Daniel Haqiqatjou – Hindi on Friday, November 25, 2016

Md Adil Hussain

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