कुछ लोग ऐसा सोचते हैं की इस्लाम को सेक्युलर बनाने की ज़रूरत है। इस्लाम को मौजूदा दौर में फिट बैठाने के लिए इसके के उन पहलुओं को तोड़ने मरोड़ने की या फिर बदल देने की कोशिश की जाती है जो अक़्ल के तथाकथित पैमाने और लिबरल सोंच के बरख़िलाफ़ होती हैं।।

मैं कहता हूँ: चलो, सेक्युलरिज़्म को ही इस्लामी बना देते हैं!

ऐसा करने के लिए, सिर्फ आप सेक्युलरिज़्म के उन पहलुओं को बदल दीजिए या ख़त्म कर दीजिए जो अक़्ल (के सही पैमाने) और इस्लामी क़ानून से टकराते हैं।

इस काम के नतीजे में आपको “इस्लामी सेकुलरिस्म” मिलेगा जो कि उतना ही सेक्युलर होगा जितना कि “सेक्युलर इस्लाम” इस्लामी है।
मतलब, बिलकुल भी नहीं।

Translation of This post
Translated by: Md Arshad Warsi

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Posted by Daniel Haqiqatjou – Hindi on Wednesday, January 18, 2017